Khel Se Jawaab", "Mera Maidaan", ya "Jeet
जब बच्चा था, लगता था बड़ा होकर सब आसान होगा, ज़िंदगी अपने हाथ में होगी, हर सपना अपना होगा, जहाँ जाना चाहूँ जाऊँगा, जो चाहूँगा कर पाऊँगा, तब क्या पता था इस रास्ते में खुद से ही लड़ना होगा। मस्तीखोर बच्चा था, खेलना मेरी जान था घूमना-फिरना, हँसना—बस अपनी ही दुनिया थी, फिर बड़ा हुआ, समझ आया future भी बनाना है, दिल में एक सपना आया—कुछ बड़ा करके दिखाना है। बारह साल की उम्र में football को मैंने चुना, खेलता गया, जीतता गया, खुद को मैंने पहचाना, लगा मेरे अंदर talent है, यही मेरा रास्ता है, फिर लगा इस field में ही मेरा पूरा वास्ता है। लेकिन जैसे-जैसे serious हुआ, pressure बढ़ता गया, अच्छा खेलने निकला था, confidence गिरता गया, दिमाग में सवाल थे, हर चीज़ को सोचता रहा, जिस चीज़ से प्यार था, उसी में मैं खोता गया। तीन साल तक खुद से ही लड़ता रहा मैं, गिरा, परेशान हुआ, फिर भी चलता रहा मैं, बहुत कुछ सहा, मगर सपना छोड़ा नहीं, अंधेरा आया, लेकिन खुद को मैंने खोया नहीं। अब वापस आया हूँ, अब खुद पे विश्वास है, मुझे पता है मेरे अंदर अभी भी वो आग है, कौन क्या बोले, अब घंटा फर्क नहीं पड़ता, कोई हँसे या रोके, मेरा रास्ता नहीं बदलता। मैं अपना करूँगा, करके ही दिखाऊँगा, आज नहीं तो कल, लेकिन ऊपर मैं जाऊँगा, Professional footballer बनना मेरा सपना नहीं— ये वो चीज़ है जिसके लिए मैं लड़ता रहूँगा। अब मैदान मेरा है, और कहानी मेरी है, गिरने के बाद उठना ही असली जीत मेरी है, कोई कुछ भी बोले, मैं पीछे नहीं हटूँगा, मैं चुप रहूँगा… और खेल से जवाब दूँगा।
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