ज़िंदगी के रास्ते
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ज़िंदगी के रास्ते, उलझनों से भरे हैं, ख़्वाब थे अपने, अब टूटे बसेरे हैं। दिल में तूफ़ान, पर चेहरा है शांत, हर मुस्कान के पीछे छुपा है अंत। कल तक था खाली, आज भी अधूरा हूँ, मेहनत मेरी सच्ची है, फिर भी मजबूरा हूँ। जिसे समझा था अपना, वही अब पराया है, अंधेरों में चला मैं, उजाला पर साया है। शहर की गलियों में, अकेलेपन का साथ, हर मोड़ पे मिलती हैं अधूरी सी बात। रैप मेरा ज़रिया है, दर्द को सुनाने का, वरना कौन पूछता है, ग़रीब के फ़साने का।
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