मुसीबत के अफसाने

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मुसीबत के अफसाने

जब चला है तो रुकने का नहीं मुसीबतों के आगे झुकने का नई किसी आगे गिड़गिड़ाने का नहीं अब हो गया है तो पछताने का नहीं कोई सुनता है तो सुनाने का नई जलता है तो से बुझाने का नई कोई बोलता है तो चुप कराने का नई ये दुनिया मतलबी है इस दुनिया में जाने का नई और गलती से इससे दिल लगाने का नई कोई कुछ भी बोले रुकने का नई कितना बड़ा हो झुकने का नई चलता जा तू रुकने का नई

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6 years ago

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