वॉयस ऑफ जीसी

0:00
0:00
वॉयस ऑफ जीसी

कल तक जो साथ खड़े थे, आज आमने-सामने खंजर लिए, कल तक जो एक थे, अब नज़रें तक मिलाने से भी जिए। पहले लड़ाई थी विचारों की, पार्टी बनाम पार्टी, फिर आई ट्रोलिंग की आँधी, हर बात हो गई खट्टी-मीठी। शब्दों ने रूप बदला, सम्मान हुआ लाचार, चरित्र पर वार हुए, गिरता गया स्तर बार-बार। जो नेता बनने निकले थे, खुद के ही बन बैठे सरदार, समाज की उम्मीदों को बेच दिया, कर दिया बेकार। ये ट्विटर का जंगल है, यहाँ सच भी बिक जाता है, जो हाँ में हाँ मिलाए वही अपना कहलाता है। जैसे ही तुम सच बोलो, तुम पर वार हजार, यहाँ इंसान नहीं टिकता, बस चलता है व्यापार। और अब हाल ये है कि बात FIR तक जा पहुँची, जहाँ मुद्दे थे बड़े, अब लड़ाई बस अहंकार में सिमटी। सोचो, ये रास्ता कहाँ ले जाएगा हमें, क्या ऐसे ही हम समाज को बचा पाएँगे हम सब मिलके? या फिर यूँ ही लड़ते-लड़ते, खुद ही हार जाएँगे, और जो सपना था बदलाव का, उसे भी मार जाएँगे

1 Comments

Leave a comment

Author
4 months ago

See track description

User avatar
10
Total plays
6
Followers
0
Following

You may also like