thik thik thik
बता दूं तुमको ये की मै भी एक का था सबसे जुड़ा हुआ मै भी बहुत नेक सा था तुम जो गई न वो सपने सजा के मेरे साथ फिर तो मैं भी न रह सका साथ एक का था अरे वो सपने वो वादे वो दिल्लगी सच था न फिर वो झूठ वो शादी की बातें रहने के वादे झूठ था न वो झूठ भी मान लिया वो तुमने जो जाना भी ठान लिया पर मेरी आदतों ने क्या ये मुकाम दिया? अरे तुम तो बोली थी तुम मेरी फिर भी तुमने करदी हेरा फेरी हर पल याद तुम्हारी है आती तुम तो कहती थी तुम मेरी। हा? मुझसे रूठ जाना फिर मेरे घर आकर मनाना मां से यूं बतलाना फिर साथ खाना पकाना क्यों तुम्हारा अब साथ नहीं तुमको कोई जज्बात नहीं अब तो तुम आ भी जाओ तुम्हारी कोई बिसात नहीं है। अच्छा तुमने वो बात कही थी मुझे छोड़ कुछ रात सही थी तुमने ही वो रात सहकर मुझे कुछ बात कही थी की तुझसे दूर होकर मुझे नींद नहीं आती है, चैन तो खो चुकी परेशानियां आ जाती है अब क्या हुआ ऐसा जो मुझको तुम यू भूल गई मैं तुम बिन कुछ नहीं ये बाते अब तुम भूल गई मैं आज भी तुम्हारे इंतजार में रहता हु तुम तो मेरे साथ थी तुम रास्ता ही मेरा भूल गई
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