करे शरारत लम्हा लम्हा
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✍️लम्हा लम्हा तिलिस्म भरा लम्हा लम्हा जिस्म से लिपटा कभी हवा में कभी ख़ुशबू के इर्दगिर्द कभी आसमां छुआ कभी फूलों से मिला इसे पकड़ने छूने की चाह ले गयी दिल को कहां कहां कोई जब रूबरू आ गया लम्हा ही था समझ आ गया✍️ 🌹प्रकाश पाखरे🌹
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