sahil

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"बुलंद आवाज़" हुक: मैं हूँ बुलंद आवाज़, दिल में आग लगी, हर शब्द मेरा बोले, जैसे बिजली की तरंग चली। सड़कों पे चलूँ, सपनों को छूता हर पल, रैप मेरा ज़ुनून, जीत लेता हर पल! पहली कविता: आया हूँ मैं मैदान में, आवाज़ मेरी रईस, रास्तों में चलूँ, ना कोई करे बेमिस। बोलते हैं शब्द मेरे, जैसे आग के दाग, मुश्किलें तो आती हैं, पर दिल है बहादुर भाग। मेरे हर रैप में छुपा है, संघर्ष का राज, हर धुन में गूँजे, मेरे सपनों का ताज। हुक: मैं हूँ बुलंद

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1 year ago

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