INTZAAR (AKASH THAKUR)

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INTZAAR (AKASH THAKUR)

∆ इंतज़ार ∆ मेरी आंखों, मेरे दिमाग , मेरे दिल के हर एक हिस्से में हो तुम , मेरी शायरी, मेरी कविता , मेरे हर एक किस्से में हो तुम , मेरे जज्बात , मेरी हर एक बात, तुम्हें सपने में देखने वाली हर वो रात, जैसे पूरा है कोई , जिसमे आधा मैं हूं और आधी हो तुम ।। कितनी बातें , कितनी मुलाकातें , तुम्हारी जुल्फों के नीचे सर रख कर सोना , दुनिया के सामने हंसना , सब मुस्कुरा कर सहना लेकिन तुम्हारी गोद में रोना , बुजदिल, जिंदादिल, दरियादिल लोगों के लिए कितना कुछ हूं मैं, लेकिन इस दिल को तुम्हारे दिल से मतलब और बेमतलब सिर्फ तुम्हारा ही होना ।। मेरी कलम , मेरी डायरी, मेरी तुकबंदी की मिसाल , लगता है हों वाक़िफ सब तुमसे, रखते हों सब जैसे तुम्हारा ही ख्याल, किस बात कि खुशी मनाऊ और किस बात का रख लूं मलाल, तुम कब आओगी मेरी जान , खा जाता है मुझे ये सवाल, सोचो क्या होता होगा हाल , खून में उबाल , दिल में भूचाल , जलजला सा आशिक बनकर , रखकर आंखों में बवाल , मेरी बेचैनी भरी सिमटी हुई नज़रें ताकती हैं वो रास्ते, करती हैं इंतज़ार, कि दिखे उन्हें मेरी तरफ आती हुई वो नजाकत भरी चाल ।। मेरी उंगलियां , मेरे हाथ , कांप रहे हैं जैसे कांपते हों वो जाड़े में , सारी दुनिया हो जैसे एक तरफ और मैं दूसरी तरफ खड़ा अकेला इस अखाड़े में, जैसे जीतना हो तुम्हें , और हारना हो खुदको , जैसे बचाना हो तुम्हें और मारना हो खुदको, मेरे आंसू , मेरा जाम , मेरी जुबां पर बस वो तुम्हारा ही नाम, मेरी किस्मत , मेरी मंज़िल , मेरी कोशिशें सब तुम्हारे ही नाम , तुम ही जैसे सब से ख़ास और मैं सबसे आम , जैसे तुम हो कोहिनूर और मेरा कुछ ना हो दाम ।। मेरे अक्षर काफी नादान , जैसे हों मरे पड़े सब और तुम पर लिखूं तो आ जाए इनमें जान, सच कहूं तरस जातें है तुम्हारी आवाज़ सुनने को मेरे कान, मेरा इश्क़ और कलम दोनों जज्बाती है ये चुप नहीं रह पाए, बस बना दें हम दोनों एक घर ,लेकर कोई मकान ।। तुम कब आओगी मेरी जान तुम कब आओगी मेरी जान तुम कब आओगी मेरी जान ।। - आकाश ठाकुर

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5 years ago

∆ इंतज़ार ∆ मेरी आंखों, मेरे दिमाग , मेरे दिल के हर एक हिस्से में हो तुम , मेरी शायरी, मेरी कविता , मेरे हर एक किस्से में हो तुम , मेरे जज्बात , मेरी हर एक बात, तुम्हें सपने में देखने वाली हर वो रात, जैसे पूरा है कोई , जिसमे आधा मैं हूं और आधी हो तुम ।। कितनी बातें , कितनी मुलाकातें , तुम्हारी जुल्फों के नीचे सर रख कर सोना , दुनिया के सामने हंसना , सब मुस्कुरा कर सहना लेकिन तुम्हारी गोद में रोना , बुजदिल, जिंदादिल, दरियादिल लोगों के लिए कितना कुछ हूं मैं, लेकिन इस दिल को तुम्हारे दिल से मतलब और बेमतलब सिर्फ तुम्हारा ही होना ।। मेरी कलम , मेरी डायरी, मेरी तुकबंदी की मिसाल , लगता है हों वाक़िफ सब तुमसे, रखते हों सब जैसे तुम्हारा ही ख्याल, किस बात कि खुशी मनाऊ और किस बात का रख लूं मलाल, तुम कब आओगी मेरी जान , खा जाता है मुझे ये सवाल, सोचो क्या होता होगा हाल , खून में उबाल , दिल में भूचाल , जलजला सा आशिक बनकर , रखकर आंखों में बवाल , मेरी बेचैनी भरी सिमटी हुई नज़रें ताकती हैं वो रास्ते, करती हैं इंतज़ार, कि दिखे उन्हें मेरी तरफ आती हुई वो नजाकत भरी चाल ।। मेरी उंगलियां , मेरे हाथ , कांप रहे हैं जैसे कांपते हों वो जाड़े में , सारी दुनिया हो जैसे एक तरफ और मैं दूसरी तरफ खड़ा अकेला इस अखाड़े में, जैसे जीतना हो तुम्हें , और हारना हो खुदको , जैसे बचाना हो तुम्हें और मारना हो खुदको, मेरे आंसू , मेरा जाम , मेरी जुबां पर बस वो तुम्हारा ही नाम, मेरी किस्मत , मेरी मंज़िल , मेरी कोशिशें सब तुम्हारे ही नाम , तुम ही जैसे सब से ख़ास और मैं सबसे आम , जैसे तुम हो कोहिनूर और मेरा कुछ ना हो दाम ।। मेरे अक्षर काफी नादान , जैसे हों मरे पड़े सब और तुम पर लिखूं तो आ जाए इनमें जान, सच कहूं तरस जातें है तुम्हारी आवाज़ सुनने को मेरे कान, मेरा इश्क़ और कलम दोनों जज्बाती है ये चुप नहीं रह पाए, बस बना दें हम दोनों एक घर ,लेकर कोई मकान ।। तुम कब आओगी मेरी जान तुम कब आओगी मेरी जान तुम कब आओगी मेरी जान ।। - आकाश ठाकुर

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