स्थिति21
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स्थिति21 शब्दो की निराश आँधियो से , दर्द झाकता. सुन रहा हूँ मन की मैं, कलम से जो मैं छापता. ऐसे रुप से,, कब से लड़ते आ रहे , जीतते फिर हारते, हारते फिर जीतते. पर कभी ना भागते. एक से शुरू हुए,, देख आज लाखों पर है. बाँध लि हैं पट्टटी नेताओ ने अपनी आंखों पर. है देख आमआदमी के रास्ते मे,, कठिनाइयां है. है मुझे एहसास मेरा, ना पराया ना शगा. कहते ये बस रोग है. मुल्य का बस मोल है, कहते दुनिया गोल है, सभी की ये पोल है, बच रहें हैं वही, जोकि धनवान है. विकट ये परिस्थिति., मानवता,, . दम है , घोट रही, सांसे ये कैद कि. भेद रहीं हैं जिंदगी. "मौत" नाम ही हैं बस, जो बदनाम हो रहीं. जीते जी जो देख रहे ,, अपनों कि लाशें फेंक रहे. पूछो इनसे जाके बस "मौत" ही क्यों बदनाम है. by- Pranay Choukade
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स्थिति21 शब्दो की निराश आँधियो से , दर्द झाकता. सुन रहा हूँ मन की मैं, कलम से जो मैं छापता. ऐसे रुप से,, कब से लड़ते आ रहे , जीतते फिर हारते, हारते फिर जीतते. पर कभी ना भागते. एक से शुरू हुए,, देख आज लाखों पर है. बाँध लि हैं पट्टटी नेताओ ने अपनी आंखों पर. है देख आमआदमी के रास्ते मे,, कठिनाइयां है. है मुझे एहसास मेरा, ना पराया ना शगा. कहते ये बस रोग है. मुल्य का बस मोल है, कहते दुनिया गोल है, सभी की ये पोल है, बच रहें हैं वही, जोकि धनवान है. विकट ये परिस्थिति., मानवता,, . दम है , घोट रही, सांसे ये कैद कि. भेद रहीं हैं जिंदगी. "मौत" नाम ही हैं बस, जो बदनाम हो रहीं. जीते जी जो देख रहे ,, अपनों कि लाशें फेंक रहे. पूछो इनसे जाके बस "मौत" ही क्यों बदनाम है. by- Pranay Choukade