नशा
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बजे life के चार और बजते रहे लगातार तबसे बिना स्वाद आचार जैसे खाना मेरा नई धुन सुनी थोड़ी देर कुछ गुण गुनी सब बोले मेहनत कर दो गुणही मे भी कर रहा दस गुणही बस चुनी सड़क से तड़क भड़क कर निकला लफ्ज का बुखार फिर भी मेरी आवाज़ किसीने ना सुनी पर ये music सुन कर हुआ मुझे नशा मे बनूंगा कलाकार बोले मेरा शिशा क्या बोल रे ले पाशा दीखता नहीं कस काय भासा हाच तोह सस्ता रस्ता करुण 10rs.चा नास्ता मी चालो बिंदास्ता खुदा ना खास्ता ना सुकून आज था मे खुदसे खुद एक राज़ था....!
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