my animal
Intro अँधेरी streets में कहीं parental control नहीं होता, murder scene में भी viewers discretion नहीं होता। रात की गोद में पलते हैं मेरे जैसे किरदार, जहाँ बचपन भी गोली से लिखता अपना अख़बार। अँधेरी streets में कहीं parental control नहीं होता, murder scene में भी viewers discretion नहीं होता। रात को मैं अकेला सोता, वर्ना दर्द ही रोता, सुबह उठकर कमर में लगा कट्टा पहले छूता। पुलिस silent में मेरी बस्ती में ढुकता, cordon घेरता, pistol aim करने से पहले थूकता। मैं गली का मुल्ज़िम, नाम मेरा file में, जीना भी crime है इस शहर की trial में। ये streets हैं भाई, यहाँ कानून सोता है, माँ का दिल रोता, बेटा खून धोता है। गोली की आवाज़ ही यहाँ का thunder, जिन्दगी डूबती जाती अँधेरे के समुन्दर। सुबह नशे में अपनी ही माँ को मैं पीटता, माँ कहती “नहीं दूँगी drugs”, बेटा फिर भी चीखता। मैं बोलता “बताओ किसने बनाया ये रास्ता?” तेरा ही बेटा आज बन गया है लावारिस वास्ता। जेल भागा मुल्ज़िम हूँ, नाम मेरा warrant पर, पुलिस की नज़र जैसे गिद्ध किसी carcass पर। भागता हूँ गलियों में जैसे शैतान अंदर, किस्मत लिखती जा रही है मौत का calendar। ये streets हैं भाई, यहाँ कानून सोता है, माँ का दिल रोता, बेटा खून धोता है। गोली की आवाज़ ही यहाँ का thunder, जिन्दगी डूबती जाती अँधेरे के समुन्दर। 🎤 Verse 3 (Climax) “ठोक दो!” चिल्लाई पुलिस, गूँजी बंदूक, पहली गोली सीने में, टूट गया सब सुकून। माँ के पैरों के पास मैं हँसता inspector, आज होना था शायद मेरा ही encounter। एक गोली कान में, एक अंदर उतर, खून बहता जैसे खुला हुआ समुन्दर। आख़िरी सांस में भी गली का ही character, मरते मरते भी हँसा ये street का gangster। 🎤 Outro अँधेरी streets में कोई parental control नहीं, यहाँ हर बच्चा hero नहीं, कई बनते villain भी। कहानी खत्म हुई, मगर सवाल रह गया अंदर, किसने बनाया ये शहर ऐसा समुन्दर।
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Intro अँधेरी streets में कहीं parental control नहीं होता, murder scene में भी viewers discretion नहीं होता। रात की गोद में पलते हैं मेरे जैसे किरदार, जहाँ बचपन भी गोली से लिखता अपना अख़बार। अँधेरी streets में कहीं parental control नहीं होता, murder scene में भी viewers discretion नहीं होता। रात को मैं अकेला सोता, वर्ना दर्द ही रोता, सुबह उठकर कमर में लगा कट्टा पहले छूता। पुलिस silent में मेरी बस्ती में ढुकता, cordon घेरता, pistol aim करने से पहले थूकता। मैं गली का मुल्ज़िम, नाम मेरा file में, जीना भी crime है इस शहर की trial में। ये streets हैं भाई, यहाँ कानून सोता है, माँ का दिल रोता, बेटा खून धोता है। गोली की आवाज़ ही यहाँ का thunder, जिन्दगी डूबती जाती अँधेरे के समुन्दर। सुबह नशे में अपनी ही माँ को मैं पीटता, माँ कहती “नहीं दूँगी drugs”, बेटा फिर भी चीखता। मैं बोलता “बताओ किसने बनाया ये रास्ता?” तेरा ही बेटा आज बन गया है लावारिस वास्ता। जेल भागा मुल्ज़िम हूँ, नाम मेरा warrant पर, पुलिस की नज़र जैसे गिद्ध किसी carcass पर। भागता हूँ गलियों में जैसे शैतान अंदर, किस्मत लिखती जा रही है मौत का calendar। ये streets हैं भाई, यहाँ कानून सोता है, माँ का दिल रोता, बेटा खून धोता है। गोली की आवाज़ ही यहाँ का thunder, जिन्दगी डूबती जाती अँधेरे के समुन्दर। 🎤 Verse 3 (Climax) “ठोक दो!” चिल्लाई पुलिस, गूँजी बंदूक, पहली गोली सीने में, टूट गया सब सुकून। माँ के पैरों के पास मैं हँसता inspector, आज होना था शायद मेरा ही encounter। एक गोली कान में, एक अंदर उतर, खून बहता जैसे खुला हुआ समुन्दर। आख़िरी सांस में भी गली का ही character, मरते मरते भी हँसा ये street का gangster। 🎤 Outro अँधेरी streets में कोई parental control नहीं, यहाँ हर बच्चा hero नहीं, कई बनते villain भी। कहानी खत्म हुई, मगर सवाल रह गया अंदर, किसने बनाया ये शहर ऐसा समुन्दर।
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