खोखली समाज
मेरे जुबान पे अब कंट्रोल नहीं खिलाफ देख ले बोल के सही हम बेकार की बातो पे बोलते नहीं कसम भवानी की कुछ देख बोल के सही हम खोलते वही सर दिखा किसे रही तू ये अकर बीट पे रखते हम पकड़ जैसे पानी के अंदर रखता मगर करे बकर बकर ये आये किधर से गटर वाले रियल ना ब्लड वाले बदल डाले चाल हम सीधे अपने बदल डाले हम रहते अपने होने का इनके भ्रम पाले काम मेरे काले कांड मेरे निराले करू कब तलक बर्दास्त करते ये जो सरको को जाम जैसे लगते सर्कस से भागे ये बचा के अपनी जान बचपन से हम बिगरे लडके मेरी जान भेड़ की भेस मे ये भेरिया तोड़ डाली तभी अपनी पेरो मे परी बेरिया एक निशाने से कइयों को भेद दिया खेल खेल मे कर दें ये कतल भवाना का अब जरा सामना क़र शब्दों का सब दोखा आँखों का रिश्ते और नातो का इनकी मीठी मीठी बातो का वादों का एहसासो का काले मेरे राजो का लाखो का क़र दें नुकसान बचा के रखे होते तो कहते ये आज मुझे भगवान इनकी ऐसी समाज इनके जैसे ना तुम तो कह ते बैठने लायक ना तुम मेरे साथ मदर वाले जात कदर करे ना तभी अब इनकी पैदाईस मेरी जान पैरलाइज़्ज़ लगती ये सम्माज खोखली इनकी आवाज की बुनियाद जरुरत पड़ने पे बदल ले अपने बाप इनके बस इतनी औकात छिछोरा मैं आज बन के आवारा रहता खुशमिजाज जिनको दिकत आ पकड़ के देखें मेरे लटके आम समझ जाएँगे मेरे अंदर कितनी आग जेब अगर गरम तो लेंगे आ के चाट सोच लगती मुझे इनकी झाट बने जो बदमाश आ के देख अकेले सामने छोड़ के अपनी सहर खोद देंगे वही कबर किनारे से दूर रह के कहीं ठहर तूफान के साथ आएगी एक लहर डूब जाएगी सहर सही हैं बगवात इनसे ये सिर्फ मेरी रोल गिनते फुके हैं सब अपने दम पे आँखों की नमी को गिन के नजायज ये बच्चे किनके अंकल सिर्फ मेरी गुनाह को गिनते गुनाह मेरी इतनी की फुक दिया कमाए पैसे हों के बे फीकरी थे साथ मेरे जिनको कहते थे जिगरी अब वों ना खास मले जा अकेले हम घास फुकने पे रचे इतिहास ना जाने फुक दिए कितने जिन्दा लास जिंदगी लगती अब बकवास इसलिए क़र रहा अलग नया शुरुआत मुझको मेरी सोच पे नाज़ देख ले लगा के हाथ मिटा के रख दूंगा तेरे अंदर की खाज अंदर तक जयगी घूस्ती ज़ब ये तलवार मेरा लेने का अलग हैं अंदाज़ बेबी के नखरे थे हजार....
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मेरे जुबान पे अब कंट्रोल नहीं खिलाफ देख ले बोल के सही हम बेकार की बातो पे बोलते नहीं कसम भवानी की कुछ देख बोल के सही हम खोलते वही सर दिखा किसे रही तू ये अकर बीट पे रखते हम पकड़ जैसे पानी के अंदर रखता मगर करे बकर बकर ये आये किधर से गटर वाले रियल ना ब्लड वाले बदल डाले चाल हम सीधे अपने बदल डाले हम रहते अपने होने का इनके भ्रम पाले काम मेरे काले कांड मेरे निराले करू कब तलक बर्दास्त करते ये जो सरको को जाम जैसे लगते सर्कस से भागे ये बचा के अपनी जान बचपन से हम बिगरे लडके मेरी जान भेड़ की भेस मे ये भेरिया तोड़ डाली तभी अपनी पेरो मे परी बेरिया एक निशाने से कइयों को भेद दिया खेल खेल मे कर दें ये कतल भवाना का अब जरा सामना क़र शब्दों का सब दोखा आँखों का रिश्ते और नातो का इनकी मीठी मीठी बातो का वादों का एहसासो का काले मेरे राजो का लाखो का क़र दें नुकसान बचा के रखे होते तो कहते ये आज मुझे भगवान इनकी ऐसी समाज इनके जैसे ना तुम तो कह ते बैठने लायक ना तुम मेरे साथ मदर वाले जात कदर करे ना तभी अब इनकी पैदाईस मेरी जान पैरलाइज़्ज़ लगती ये सम्माज खोखली इनकी आवाज की बुनियाद जरुरत पड़ने पे बदल ले अपने बाप इनके बस इतनी औकात छिछोरा मैं आज बन के आवारा रहता खुशमिजाज जिनको दिकत आ पकड़ के देखें मेरे लटके आम समझ जाएँगे मेरे अंदर कितनी आग जेब अगर गरम तो लेंगे आ के चाट सोच लगती मुझे इनकी झाट बने जो बदमाश आ के देख अकेले सामने छोड़ के अपनी सहर खोद देंगे वही कबर किनारे से दूर रह के कहीं ठहर तूफान के साथ आएगी एक लहर डूब जाएगी सहर सही हैं बगवात इनसे ये सिर्फ मेरी रोल गिनते फुके हैं सब अपने दम पे आँखों की नमी को गिन के नजायज ये बच्चे किनके अंकल सिर्फ मेरी गुनाह को गिनते गुनाह मेरी इतनी की फुक दिया कमाए पैसे हों के बे फीकरी थे साथ मेरे जिनको कहते थे जिगरी अब वों ना खास मले जा अकेले हम घास फुकने पे रचे इतिहास ना जाने फुक दिए कितने जिन्दा लास जिंदगी लगती अब बकवास इसलिए क़र रहा अलग नया शुरुआत मुझको मेरी सोच पे नाज़ देख ले लगा के हाथ मिटा के रख दूंगा तेरे अंदर की खाज अंदर तक जयगी घूस्ती ज़ब ये तलवार मेरा लेने का अलग हैं अंदाज़ बेबी के नखरे थे हजार....