धूप की संगत में
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🏕️गुलाबी सर्दी क्या आई गुनगुनी धूप की संगत भायी धूप की संगत में खोया हर दिल चाहत में चलें चार क़दम फ़ुर्ती भरे कभी पेड़ की डाली इशारा करे तपिश-ठंडक का मेल प्यारा है हवा भी सांसों का सहारा है जो भी मिला इन राहों में समेटता मिला तपन बांहों में🏕️ 🥰प्रकाश पाखरे🥰
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