Mere मन sun

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Mere मन sun

सुन ले तू खुद को ना देख कहीं ओर झाँक अपने मन मे मचाये कितना शोर उछालता इधर उधर लगाये कितना जोर रुक के तो देख तू चला किस ओर मेरे मन रुक - सुन तो जरा कुछ करने से पहले तो सोच तू जरा हमेशा कहता खाली, वज़ह तो बता फिर बाद मे दोनो को मिलती सजा जिंदगी तो मिली - पर मन के अधीन इस मन के हाथों फिर मारता ज़मीर जब भी कुछ मिला तू फिर भी रोया तूने और कि चाह मे सब कुछ खोया सुन ले तू खुद को ना देख कहीं ओर झाँक अपने मन मे मचाये कितना शोर उछालता इधर उधर लगाये कितना जोर रुक के तो देख तू चला किस ओर लगी भूक इतनी - पर तुझे ये नहीं खाना तुझे ये नहीं पसंद कहीं ओर जाना जाने कौनसी भूक - तू leke हुआ पैदा समझ मे ना आए तुझे दिखता बस पैसा मिले तारीफ तो बढ़ता है तू विपरित हो तो बात डरता है तू कितना असान लगे खेलना तुझसे कुछ भी दिखे नया दगा करे खुद से

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12 months ago

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12 months ago

Nah

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