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11 बजे, मैं दिल से नहीं — दिल की लिखूं सारी बात 11 बजे, कोई आ के समझा दे मुझे ये हालात 11 बजे, अब ना रहे दिल में कोई राज़ 11 बजे, जब हर चीज़ लगे जैसे हो कोई साज़िश या साज़ 11 बजे, फिर यादें खिंचती हैं आंखों के पीछे, वो लम्हे, जो थे मेरे — अब लगते हैं किसी और के बातें जो कही नहीं, अब वो सीने में जलती हैं, और जो कही थीं, वो गूंगी दुआ बन के पलती हैं। ग़म को छुपाना सीख लिया — अब आदत सी बन गई है, मुस्कान भी नक़ाब है — और तन्हाई जनम की सजा है। मैं नहीं चाहता था टूटना, पर टूटा भी मैं ही था, क्योंकि खुद से बड़ा झूठ — मैंने खुद ही कहा था। अब ना किसी से सवाल, ना किसी से शिकायत, जिसे समझा घर — उसी ने की बगावत। पर मैं अब भी खड़ा हूं — थोड़ा टूटा, थोड़ा ज़िंदा, जैसे वक़्त ने मुझे पत्थर से खुदा बना डाला, बिन मांगे पूजा 11 बजे, मैं दिल से नहीं — दिल की लिखूं सारी बात 11 बजे, कोई आ के समझा दे मुझे ये हालात 11 बजे, अब ना रहे दिल में कोई राज़ 11 बजे, जब हर चीज़ लगे जैसे हो कोई साज़िश या साज़

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1 year ago

11 बजे, मैं दिल से नहीं — दिल की लिखूं सारी बात 11 बजे, कोई आ के समझा दे मुझे ये हालात 11 बजे, अब ना रहे दिल में कोई राज़ 11 बजे, जब हर चीज़ लगे जैसे हो कोई साज़िश या साज़ 11 बजे, फिर यादें खिंचती हैं आंखों के पीछे, वो लम्हे, जो थे मेरे — अब लगते हैं किसी और के बातें जो कही नहीं, अब वो सीने में जलती हैं, और जो कही थीं, वो गूंगी दुआ बन के पलती हैं। ग़म को छुपाना सीख लिया — अब आदत सी बन गई है, मुस्कान भी नक़ाब है — और तन्हाई जनम की सजा है। मैं नहीं चाहता था टूटना, पर टूटा भी मैं ही था, क्योंकि खुद से बड़ा झूठ — मैंने खुद ही कहा था। अब ना किसी से सवाल, ना किसी से शिकायत, जिसे समझा घर — उसी ने की बगावत। पर मैं अब भी खड़ा हूं — थोड़ा टूटा, थोड़ा ज़िंदा, जैसे वक़्त ने मुझे पत्थर से खुदा बना डाला, बिन मांगे पूजा 11 बजे, मैं दिल से नहीं — दिल की लिखूं सारी बात 11 बजे, कोई आ के समझा दे मुझे ये हालात 11 बजे, अब ना रहे दिल में कोई राज़ 11 बजे, जब हर चीज़ लगे जैसे हो कोई साज़िश या साज़

1 year ago

WOW ⚡

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1 year ago

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