यादां
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हां अपनी वो बचपन की यादों में याद हे, मुझे वो यादें अपनी वो बचपन की बातें, वही तो चमकती रातें,जिनमें तारे गिनते थे हम देखा,याद है मुझे। गर्मी की छुट्टियों में मिलते थे हम। क्या याद है तुझे ? हर एक छोटी से छोटी चीज के लिए लड़ते थे हम। शाम को बाघों में पैरों से पैर मिलाके चलते थे हम। रातों में सपनों में तु ही तो आती और लगता भी जैसे असल लाइफ तो जीते थे हम। दिन में थी गर्मी और रात में ठंड, चाय की प्याली थी हाथ में और चुस्कियों के संग पीते थे हम। स्कूल जाने के दिन पास जब आते। तो, तुझसे दूर जाने की यादें मुझे सताती । लोगो की बातें , तेरे खिलाफ मुझे भड़काती। कभी न किया था शक तुझपे ,तेरी तो बाते मुझे सुकून दिलाती। एक तू है जो छुट्टियों में मुझे स्कूल की बातें बताती ।
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हां अपनी वो बचपन की यादों में याद हे, मुझे वो यादें अपनी वो बचपन की बातें, वही तो चमकती रातें,जिनमें तारे गिनते थे हम देखा,याद है मुझे। गर्मी की छुट्टियों में मिलते थे हम। क्या याद है तुझे ? हर एक छोटी से छोटी चीज के लिए लड़ते थे हम। शाम को बाघों में पैरों से पैर मिलाके चलते थे हम। रातों में सपनों में तु ही तो आती और लगता भी जैसे असल लाइफ तो जीते थे हम। दिन में थी गर्मी और रात में ठंड, चाय की प्याली थी हाथ में और चुस्कियों के संग पीते थे हम। स्कूल जाने के दिन पास जब आते। तो, तुझसे दूर जाने की यादें मुझे सताती । लोगो की बातें , तेरे खिलाफ मुझे भड़काती। कभी न किया था शक तुझपे ,तेरी तो बाते मुझे सुकून दिलाती। एक तू है जो छुट्टियों में मुझे स्कूल की बातें बताती ।