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लफड़े का सीन ..पकड़ेगा.. सर ही फाढेगा मरने से डरता कहां जिगरा जो सीने पे खून नहीं .. बारूद ही भरा है सीने में हुकुम करेगा इक्का, पर वो रख देता बेगम के सर पे ताज राजा को दे देता सिक्के हजार कयामत तो देखी पर वो डरता कहां मौत तो चाहत थी किसी जमाने में हां प्यार था पर अब ....सिर्फ खून का कारोबार था माशूका तो आज भी राजी है पर ....अब दूरी हि बेहतर है हम दो जिस्म एक जान जान .... और जिंदगी हमारी सौतन है मेरी आवाम में.. नाम तेरा बदनाम जब से हम अलग मेरी जिंदगी तो मातम है खुली हवा में जी रहा पर ...दम मेरा घुट रहा तेरी यादें ...तुझे सोच तड़प रहा आज आदत लगने ना दे दूरी ही बेहतर है जीने दे
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