sahara
0:00
0:00
अपनी कलम से लिखूं वो लफ़्ज़ हो तुम, अपने दिमाग से सोच लूँ वो ख्याल हो तुम, अपनी दुआओ में मांग लूँ वो मन्नत हो तुम, और जिसे हम अपने दिल में रखते हैं वो चाहत हो तुम। भंवर से निकल कर एक किनारा मिला है, जीने को फिर एक सहारा मिला है, बहुत कश्मकश में थी ये जिंदगी मेरी, अब इस जिंदगी में साथ तुम्हारा मिला है।
You may also like

Leave a comment
See track description ↑