My Poetry×Beat(Mere Priy Kanhaiya!)

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My Poetry×Beat(Mere Priy Kanhaiya!)

___मेरे प्रिय कन्हैया!___ सुकून की तलाश में, मैं सारा जग घूमेया, पर मुझको नहीं मिला! तुझ जैसा कोई, ओ मेरे कन्हैया! मेरा दिल है वृंदावन, तू बस उसमें बस जा! मेरे दिल के हर एक व्यथा को, तू अपने मनोहर रूप से हर जा! तू मेरे जीवन के रथ का सारथि, फ़िर क्या ज़रूरत मुझको किसी और यार की, जो सिर्फ़ दो पग ही चलते हैं, इसलिए मुझे सख़्त से सख़्त ज़रूरत है, तुझ जैसे जीवन आधार की! जिस तरह अर्जुन ने तेरे कहने पे को दुनिया त्यागा, फ़िर तोड़ दिया फीके रिश्तों का धागा, उसी तरह मैं भी सारा ये मोह त्याग दूंगा, तुझे पाकर मैं मेरे प्रिय माधव विजय ध्वजा! सुकून की तलाश में, मैं सारा जग घूमेया, पर मुझको नहीं मिला! तुझ जैसा कोई, ओ मेरे कन्हैया! मेरा दिल है वृंदावन, तू बस उसमें बस जा! मेरे दिल के हर एक व्यथा को, तू अपने मनोहर रूप से हर जा!

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2 years ago

___मेरे प्रिय कन्हैया!___ सुकून की तलाश में, मैं सारा जग घूमेया, पर मुझको नहीं मिला! तुझ जैसा कोई, ओ मेरे कन्हैया! मेरा दिल है वृंदावन, तू बस उसमें बस जा! मेरे दिल के हर एक व्यथा को, तू अपने मनोहर रूप से हर जा! तू मेरे जीवन के रथ का सारथि, फ़िर क्या ज़रूरत मुझको किसी और यार की, जो सिर्फ़ दो पग ही चलते हैं, इसलिए मुझे सख़्त से सख़्त ज़रूरत है, तुझ जैसे जीवन आधार की! जिस तरह अर्जुन ने तेरे कहने पे को दुनिया त्यागा, फ़िर तोड़ दिया फीके रिश्तों का धागा, उसी तरह मैं भी सारा ये मोह त्याग दूंगा, तुझे पाकर मैं मेरे प्रिय माधव विजय ध्वजा! सुकून की तलाश में, मैं सारा जग घूमेया, पर मुझको नहीं मिला! तुझ जैसा कोई, ओ मेरे कन्हैया! मेरा दिल है वृंदावन, तू बस उसमें बस जा! मेरे दिल के हर एक व्यथा को, तू अपने मनोहर रूप से हर जा!

2 years ago

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